JAAT ki Kahavat Story

56 जाट कहावतें
1) बिन जाटां, किसनें पानीपत जित्ते!
2) जाटणी कदे, विधवा ना होती!
3) अनपढ़ जाट पढ़े बरगा अर पढ़या जाट खुदा बरगा!
4) जाट रै जाट, सोलह दूणी आठ!
5) दो पाट्टां (पाट) के बीच म्ह साबूत रह्या ना जाट!
6) जाट बलवान, जय भगवान!
7) जाट छिक्या अर राह रुय्का!
8) ऐकले जाट कै फसियो ना, इनकी पंचायत तैं डरियो ना!
9) अक्ल मारी जाट की, रांघड़ राख़या हाळी, वो उसनै काम कह, वो उसनै दे गाळी!
10) आग्गम बुद्धि बाणिया, पाच्छ्म बुद्धि जाट!
11) बावन बुद्धि बाणिया, छप्पन बुद्धि जाट!
12) कविता सोहै भाट की, खेती सोहै जाट की (खेती जट्ट की, बाजी नट की)!
13) काळा बाह्मण, धोळा चमार, तिलकधारी बाणीया अर कैरे जाट तें बच कें रहणा चहिये!
14) खागडा की लड़ाई म्ह, भेड़िये की चतराई म्ह, अर जाट की बुराई म्ह कदे नी फहना चाहिए!
15) गूमड़ा अर जाटडा, बंधे ही भले!
16) गुज्जर के सौ, जाट के नौ अर माळी के दो किल्ले बराबर हो सें|
17) जाट बाहरने (दर) पै आये के घर तक बसा दे!
18) गाम के चौराहे पै, जाट गावै राहे पै!
19) जाट ने हारया तब जाणिये, ज्ब कह पुराणी बात!
20) जाट-जाट का दुश्मन, ज्यांते जाट की 36 कौम दुश्मन!
21) जाट-जाट के साठे करदे, घाले-माले (जाट मर्द साठा ते पाठा|)
22) जाट जब तक साथी, हाथ म्ह होवै लाठी!
23) जाण मारे बाणिया, पिछाण मारे जाट!
24) जाट अर सांप म्ह तै पहल्यां किसने मारे, सांप नै जाण दे अर जाट नै समारे!
25) जाट, बैरागी, नटवा, चौथा राज-दरबार, यें चारों बंधे भले, खुल्ले करें बिगाड़!
26) जाट जब दुश्मन पिछानना अर मंत्रणा करणी शुरु कर दे, तै सब काहें नै कूण म्ह धर दे!
27) जाट एक समुन्दर सै अर जो भी दरिया (जाति) इसमै पड़ती है वाः समुन्दर की बण ज्या सै!
28) जाट एक दमड़ी पै लहू-लुहान, बाणिया सौ पै भी ना खींचा-ताण!
29) जाट जितना कटेगा, उतना ही बढ़ेगा!
30) जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै!
31) जाटड़ा और काटड़ा, अपणे को ही मारे!
32) जाट कै लाग्गी हंगाई, म्हास बेच कैं घोड़ी बिसहाई!
33) जाट नै मरया जद जाणिये जब उसकी तेरहँवी हो ले!
34) जाट जाट को मारता यही है भारी खोट, ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट!
35) जाट नै कै तै जाट मारै अर नहीं तै भगवान (जाट को मारै जाट या फिर करतार|)|
36) जाट तैं यारी अर शेर की सवारी – एक बात हो सें|
37) जाट की मरोड़, भला कूण दे तोड़|
38) जाट कै तो खा कै मरेगा कै बोझ ठा कै मरेगा|
39) जाटां का बुड्ढा, बुढापे मै बिगड़या करै|
40) जाट नाट्या अर कर्जा पाट्या|
41) जाट रै जाट, खड़ी करदे तेरी खाट, बीज खोस ले बोण नी दे| सोड़ खोस ले सोण नी दे, डोग्गा मारै रोण नी दे||
42) नट विद्या आ जावै पर जट विद्या कोनी आवै|
43) पात्थर म्ह घुणाई कोन्या, जाट म्ह समाई कोन्या!
44) कटे जाट का, सीखै नाई का!
45) ब्राह्मण खा मरे, तो जाट उठा मरे!
46) बणिया हाकिम, ब्राह्मण शाह, जाट मुहासिब, जुल्म खुदा।
47) भूरा चमार, काला जाट अर कानी लुगाई, काले भीतर आले बताये!
48) भरा पेट जाट का, हाथी को भी गधा बतावे (भरा पेट जाट का, अम्बर म्ह मओहरे करे!)
49) माँगे तो, जाट दे ना गंडा भी, ब्यन मांगे दे दे भेल्ली|
50) मकौड़ा, घोड़ा और जठोड़ा पकड़ने पर कभी छोड़ते नहीं!
51) मिट्टी के बर्तन म्ह धरया घी, हिन्दू की दाड़ी, कई बेटियों वाले पिता और जाट को दिए कर्ज का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए|
52) जाटां का समूह, अळसु-पळसु बाताँ का ढूह|
53) जाट जब आप्पे तैं बाहर हो ज्या तो खुदा-ए उसनें थाम सकै|
54) जाट की हांसी आम आदमी की पसली चटका दे|
55) जै जाट किसे-नैं घी-दूध खुवावैगा, तो उसके गळ म रस्सा डाल कें|
56) 4 मण के चार पाए
40 मन की खाट
80 मण का कोठडा
अर 100 मण का जाट