Spiritual Message – Story of sardar

एक होटल में एक आदमी दाल रोटी खा रहा था।अच्छे परिवार का बुजुर्ग था । खाने के बाद जब बिल देने की बारी आई तो वो बोला कि उसका पर्स घर में रह गया है और थोड़ी देर में आकर बिल चुका दूंगा। काऊंटर पर बैठे सरदार जी ने कहा, ” कोई बात नहीं, जब पैसे आ जाएं तब दे जाना” और वो वहां से चला गया। वेटर ने जब ये देखा तो उसने कांउटर पर बैठे सरदार जी को बताया कि ये आदमी पहले भी दो तीन होटलों में ऐसा कर चुका है और ये पैसे कभी भी नहीं आते । इस पर उन सरदार जी ने कहा, “वो सिर्फ दाल-रोटी खा कर गया है कोई कोफ्ते,पनीर, राइस प्लेट, शिरा,पूरी वगैरह खा कर नहीं गया, उसने ऐयाशी करने के लिए नहीं खाया सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए खाना खाया। शायद उसकी कोई न कोई मज़बूरी रही होगी तभी तो वह भूखा इंसान इसे होटल समझ कर नहीं आया था, वह तो इसे शायद गुरूद्वारा समझ कर आया होगा, और हम पंजाबी लोग लंगर के पैसे नहीं लेते, और हम तो उसके आभारी हे, कि उसने हमारी होटल को गुरुद्वारा समझा। … धन्य हो ऐसी विचारधारा… …??…